Thursday, May 26, 2011

जरूरी नहीं ग़ालिब...

जरूरी नहीं ग़ालिब कि मै (शराब) पी कर ही मज़ा आता है,
मै तो वो नूर है, जो अश्कों के सहारे जिया जाता है,
हम तो वो ज़र्रा है, जो आफ़ताब के दिल में सुलगा करते है,
जाम जो हांथों में लिया करते है, उन्हें होंठों से नहीं, आँखों से पिया करते है...

Tuesday, May 24, 2011

शायर, महफिलों में भी बैठ कर...

शायर, महफिलों में भी बैठ कर, पिया नहीं करते,
लोगो की ज़िन्दगी में रह कर भी, जिया नहीं करते,
यूँ ही कभी-कभी लिख देते है दिल की हसरत,
जाम, पैमाने में ले कर भी, पिया नहीं करते...
लोग जानते नहीं हमको, क्यूँ की मुलाकात किसी से किया नहीं करते,
पर मेरे हर लफ्ज़ से वाकिफ है वो, तभी चैन से रहा नहीं करते,
जब भी देखते है मेरे लफ़्ज़ों को, तड़प वो जाते है,
हम वो है जो, दूसरों के सहारे जिया नहीं करते,
यूँ ही कभी-कभी लिख देते है दिल की हसरत,
जाम, पैमाने में भर कर भी, पिया नहीं करते,
शायर, महफिलों में बैठ कर, पिया नहीं करते...

Monday, May 16, 2011

अब रातों को नींद अच्छी आती है...

अब रातों को नींद अच्छी आती है, दिखती हर चीज़ कुछ ख़ास है,
लगता है मौसम बदल रहा है, या फिर यह प्यार की शुरुआत है,
हर चेहरे में उसका ही अक्स नज़र आता है, क्या यह एक नए युग की शुरुआत है,
लगता है मौसम बदल रहा है, या फिर यह प्यार की शुरुआत है,
अब रातों को नींद अच्छी आती है, दिखती हर चीज़ ख़ास है...

कौन हूँ मैं? एक आम आदमी...

कौन हूँ मैं? एक आम आदमी,
गुमनामी की काली अंधियारी रातों में भटकता, एक आम आदमी,
लोगो की भीड़ में, एक नए अहम् की तलाश करता, एक आम आदमी,
जाने-पहचाने चेहरों के बीच में भी अनजान रहता, आम आदमी,
सड़कों पर होते खून और बलात्कारों को होते देख भी आँखे मूँद लेता, आम आदमी,
गमों और गुनाहों से अपनी गर्दन बचाता, आम आदमी,
अन्याय को बढते देख बस खुद के ज़हन से लड़ता, आम आदमी,
अपने ही परिवेश में खुद को नज़रबंद देखता, आम आदमी,
खुद को बेबस, लाचार और अपांग मान लेता, आम आदमी,
फिर भी अंदर ही अंदर सुलगता रहता, आम आदमी,
पर फिर भी खुद से सवाल करता, आम आदमी,
कौन हूँ मैं? एक आम आदमी...

Friday, May 13, 2011

कभी-कभी नहीं, हर पल मिली ज़िन्दगी...

कभी-कभी नहीं, हर पल मिली ज़िन्दगी,
कभी आज, कभी कल मिली ज़िन्दगी,
कभी बे-शकल, कभी हम-शकल मिली ज़िन्दगी,
कभी-कभी नहीं, हर पल मिली ज़िन्दगी...

भागती-दौड़ती भीड़ सी इस ज़िन्दगी में, एक पहचाने चेहरे सी मिली ज़िन्दगी,
तपती गर्मी में, पीपल की छाव सी मिली ज़िन्दगी,
प्यासे को, पानी के ताल सी मिली ज़िन्दगी,
कभी आज, कभी कल मिली ज़िन्दगी,
कभी-कभी नहीं, हर पल मिली ज़िन्दगी...

मुसीबतों से घिरी ज़िन्दगी, या मुसीबतों से घिरा मैं...

मुसीबतों से घिरी ज़िन्दगी, या मुसीबतों से घिरा मैं,
ग़मों से जान ज़िन्दगी, या ज़िन्दगी से जान ग़म,
पल-पल उलझती ज़िन्दगी, या हर पल से उलझता मैं,
मुसीबतों से घिरी ज़िन्दगी, या मुसीबतों से घिरा मैं...

अनजाने सुख की तलाश में भागती ज़िन्दगी, या अंधी खुशियों के पीछे भागता मैं,
ज़िन्दगी की तलाश में, ज़िन्दगी से दूर भागता मैं,
पल-पल उलझती ज़िन्दगी, या हर पल से उलझता मैं,
मुसीबतों से घिरी ज़िन्दगी, या मुसीबतों से घिरा मैं...

आज मेरे जन्म-दिवस पर...

आज सुबह कुछ नयी सी थी, पुरानी सी न थी,
मंद-मंद मुस्कुराती हवा, लगती कुछ सुहानी सी थी,
सूरज की मद्धम लालिमा भी, नए दिन का आगाज़ लिए करती मेरा अभिनन्दन,
आज मेरे जन्म-दिवस पर, बात कुछ सुहानी सी थी,
लफ़्ज़ों का मायाजाल बुनता जा रहा मैं,
धीरे-धीरे हर एक लफ़्ज़, चुनता जा रहा मैं,
अपना ही अभिनन्दन करते, मेरे लफ़्ज़ों को सुनता जा रहा मैं,
धीरे-धीरे हर लफ्ज़ चुनता जा रहा मैं,
मंद-मंद मुस्कुराती हवा में, बात कुछ सुहानी सी थी,
आज मेरे जन्म-दिवस पर, नयी कुछ कहानी सी थी,
सूरज की मद्धम लालिमा भी, नए दिन का आगाज़ लिए करती मेरा अभिनन्दन,
आज सुबह कुछ नयी सी थी, पुरानी सी न थी,
आज मेरे जन्म-दिवस पर, बात कुछ सुहानी सी थी...