Wednesday, December 12, 2012

कुछ, यूँ ही...

मोहोब्बत की जो मैंने, कोई खता तो नहीं,
एक आस सजाये बैठा हूँ, कोई सजा तो नहीं,
हाँ! इंतज़ार में जिंदा हूँ ज़माने की तरह,
राह-इ-नज़रें टिकाये बैठा हूँ, कोई खता तो नहीं ।

लफ़्ज़ों से लफ्ज़ मिला ले अगर,
दिल को दिल से मिला ले अगर,
हाँ में हाँ मिला ले अगर,
तो ज़िन्दगी रोशन सी हो जाए,
तुमको जो दिल में बसा ले अगर,
नज़रों में तुमको समां ले अगर,
बाहों में तुमको छुपा ले अगर,
तो खुशियों का दामन भी भर जाए ।

इश्क की तर्ज़ पे, 
जाने किस-किस मर्ज़ से,
मैंने रिश्ता जोड़ लिया,
कोई अपना दिखा भीड़ में,
कोई सपना सजा झील में,
मैंने दिल से दिल जोड़ लिया,
जो मुस्कुरा कर हाथ थामा,
मैंने अपना सांस थामा,
हाथों को जोड़ लिया,
तुमसे रिश्ता जोड़ लिया,
इश्क की तर्ज़ पे,
जाने किस-किस मर्ज़ से,
मैंने रिश्ता जोड़ लिया ।

Tuesday, December 11, 2012

छोटे बड़े का खेल है सारा...

छोटे बड़े का खेल है सारा,
कोई बड़ा सगा, तो कोई छोटा प्यारा,
लफ़्ज़ों का यह खेल नयारा,
छोटे बड़े का खेल है सारा ।

कह कर अपना जो हाथ बढ़ाया,
संग मैं भी खिचता चला आया,
कह कर अपना जो गले लगाया,
दिल से जुड़ा मैंने खुद को पाया,
कोई बड़ा सगा, तो कोई छोटा प्यारा,
लफ़्ज़ों का यह खेल नयारा,
छोटे बड़े का खेल है सारा ।।

चलते-चलते...

राह में चलते-चलते कुछ लफ्ज़ उठा लाया हूँ,
कुछ मेरे हिस्से के तो कुछ तेरे हिस्से से कहने आया हूँ,
शायरी का शौक न था यारों, यह बस दिल-इ-अदायगी थी,
बस दिल की कहने को लफ्ज़ जोड़ लाया हूँ,
राह में चलते-चलते कुछ लफ्ज़ उठा लाया हूँ ।

ये रात...

ये रात, सपनों से भरी, ओढ़ आई चांदनी,
सपनों की चादर सजाये, बाहें फलाये खाड़ी,
ताल पर कुछ गीत सजते, राह उजियारी नयी,
दूर बजती धुन नयी लिए परछाई हो खाड़ी,
ये रात, सपनों से भरी, ओढ़ आई चांदनी,
सपनों की चादर सजाये, बाहें फलाये हो खाड़ी ।

Monday, December 10, 2012

शायरों की भी क्या खूब कहानी है...










शायरों की भी क्या खूब कहानी है,
हाथों में कलम, आँखों में पानी है,
कुछ गम-जर्द है तो कुछ टूटे दिल की निशानी है,
शायरों की भी क्या खूब कहानी है ।

नज़रों में देख, सब कुछ बयान करते है,
कुछ कहते नहीं बस लफ़्ज़ों में बहते है,
कभी अपने से तो कभी दुनिया बेगानी है,
हाथों में कलम, आँखों में पानी है,
शायरों की भी क्या खूब कहानी है ।।

Thursday, December 6, 2012

जो कच्ची पड़ जाए...












बात बड़ी न बोलिए, जो कच्ची पड़ जाए,
बात वही बोलिए, जो दिल में गड़ जाए,
झूठ-साच की बात यह, देर समझ में आये,
बात बड़ी न बोलिए, जो कच्ची पड़ जाए ।
बात कटु "मैं" बोलिए, दिल में भी चुभ जाए,
पर ध्यान-धपट के सोचिये, दिल क्यूँ है दुखाये,
बात बुरी वही है, जो अश्कों में तर जाए,
बूँद-बूँद बरस कर, घाव बड़ा कर जाए,
तो, बात बड़ी न बोलिए, जो कच्ची पड़ जाए,
बात वही बोलिए, जो दिल में गड़ जाए ।।

दैउ शब्दन की आशा...

तोलत बोलत जानिये जो सज्जन होए,
कटु वचन जो बोलिए, मन विचलित होए,
देख पराई दुनिया, मत चौकों सकुचाये,
टोल मोल के बोलिए, जो इंसान होए ।
प्रीत परायी कैसी यह, दैउ शब्दन की आशा,
चंचलता विचलित कर दे, कटु वचनों की भाषा,
मीठन बोल जो बोलिए, मिले दिलों की आस,
गन्दी जिवाह जो करिए, फसे दिलों में फांस,
तोलत बोलत जानिये जो सज्जन होए,
टोल मोल के बोलिए जो इंसान होए ।।